ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का विशेष महत्व है। हमारे जीवन की घटनाएँ, सुख-दुःख, सफलता-असफलता, स्वास्थ्य, धन, संतान एवं करियर सभी कुछ ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रह अशुभ स्थिति में हों या दशा-अंतर्दशा में पीड़ा दे रहे हों, तब नवग्रह शांति पूजा अत्यंत लाभदायक मानी जाती है। नवग्रह शांति भैरव पूजा एक ऐसा दिव्य अनुष्ठान है जो न केवल नौ ग्रहों की शांति करता है, अपितु भगवान भैरव की कृपा से जीवन में सकारात्मकता लाता है।
कई बार केवल नवग्रह शांति से भी समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो पाता, विशेषकर जब कुंडली में राहु-केतु, शनि या मंगल की पीड़ा अत्यधिक हो। ऐसे में भैरव पूजा को नवग्रह शांति के साथ जोड़ना एक अत्यंत प्रभावी और शक्तिशाली उपाय सिद्ध होता है। तो आज ही उज्जैन के योग्य पंडित मयंक शर्मा जी से नीचे दिये गए नंबर पर कॉल करें।
नवग्रह कौन हैं और उनका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
हिंदू ज्योतिष में नवग्रह निम्नलिखित हैं:
- सूर्य — आत्मा, पिता, सरकारी नौकरी, सम्मान
- चंद्र — मन, माता, भावनाएँ, मानसिक शांति
- मंगल — साहस, भूमि, संपत्ति, रक्त संबंधी रोग
- बुध — बुद्धि, व्यापार, संचार, शिक्षा
- गुरु (बृहस्पति) — धर्म, विवाह, संतान, धन-वृद्धि
- शुक्र — सुख-विलास, वाहन, प्रेम, भौतिक सुख
- शनि — कर्मफल, न्याय, दीर्घायु, कठिन परिश्रम
- राहु — भ्रम, विदेश यात्रा, अचानक धन-हानि, विष
- केतु — मोक्ष, आध्यात्मिकता, पूर्व जन्म के कर्म, रोग
जब ये ग्रह कुंडली में अशुभ भावों में बैठे हों, वक्री हों, या शत्रु राशि में हों, तो व्यक्ति को अनेकानेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी एक साथ कई ग्रहों की दशा चलने पर जीवन अत्यंत कष्टमय हो जाता है।
भगवान भैरव कौन हैं?
भगवान भैरव शिवजी के अंशावतार माने जाते हैं। वे कोटवाल/काशी के रक्षक हैं और समस्त ग्रहों के स्वामी भी माने जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में भगवान भैरव को “ग्रहेश्वर” भी कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि भैरवजी की कृपा से सभी ग्रह अनुकूल हो जाते हैं। भैरव तंत्र में भैरव पूजा को अत्यंत प्रभावी माना गया है। भगवान भैरव की उपासना से भूत-प्रेत बाधा, नज़र दोष, ग्रह पीड़ा, कर्ज़, रोग एवं शत्रु समस्याएँ दूर होती हैं।
नवग्रह शांति भैरव पूजा क्या होती है?
नवग्रह शांति भैरव पूजा एक सम्पूर्ण अनुष्ठान है जो भौतिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर व्यक्ति को लाभ पहुँचाता है। यह पूजा केवल ग्रहों की शांति तक सीमित नहीं है, अपितु भगवान भैरव की कृपा से जीवन की सभी बाधाओं को दूर कर सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि आप भी ग्रह दोष, कैरियर में असफलता, धन की हानि, स्वास्थ्य समस्याएँ, या किसी भी प्रकार की अदृश्य बाधा से परेशान हैं, तो यह पूजा आपके लिए वरदान सिद्ध हो सकती है।
नवग्रह शांति भैरव पूजा की आवश्यकता क्यों होती है?
कई बार ज्योतिषी केवल नवग्रह शांति पूजा की सलाह देते हैं, परंतु यदि कुंडली में राहु-केतु का प्रभाव अत्यधिक हो, या शनि की साढ़ेसाती, ढाईया चल रही हो, या फिर कालसर्प दोष, पितृ दोष, गुरु चांडाल दोष जैसे दोष हों, तब केवल नवग्रह शांति से पूर्ण लाभ नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में नवग्रह शांति के साथ भैरव पूजा कराने से दोहरा लाभ मिलता है:
- नवग्रह शांति से ग्रहों की ऊर्जा संतुलित होती है।
- भैरव पूजा से ग्रहों की नकारात्मकता का नाश होता है।
- भूत-प्रेत एवं नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है।
- कर्मकांड में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं।
नवग्रह शांति भैरव पूजा के विशेष लाभ कौन-कौन से है?
1. ग्रह शांति एवं अनुकूलता
नवग्रह शांति भैरव पूजा कराने से कुंडली में जो ग्रह अशुभ फल दे रहे हैं, वे धीरे-धीरे अनुकूल होने लगते हैं। सूर्य का तेज, चंद्र की शीतलता, मंगल का साहस, बुध की बुद्धि, गुरु का आशीर्वाद, शुक्र का सुख, शनि का न्याय, राहु-केतु की शांति — ये सभी एक साथ प्राप्त होते हैं।
2. स्वास्थ्य लाभ
यदि किसी व्यक्ति को दीर्घकालिक रोग, मानसिक तनाव, अनिद्रा, या रक्त संबंधी समस्याएँ हैं जो ग्रहों के कारण हैं, तो इस पूजा से महत्वपूर्ण लाभ मिलता है।
3. धन-वृद्धि एवं व्यापारिक सफलता
बुध, गुरु और शुक्र के अनुकूल होने से व्यापार में वृद्धि होती है। नौकरी में पदोन्नति, सरकारी कार्यों में सफलता, और अटके हुए धन की प्राप्ति होती है।
4. विवाह एवं संतान सुख
जिनकी कुंडली में विवाह में विलंब हो रहा हो, या गृहस्थ जीवन में कलह हो, या संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो, उनके लिए यह पूजा अत्यंत लाभदायक है।
5. शत्रु नाश एवं बाधा मुक्ति
भगवान भैरव की कृपा से छुपे हुए शत्रु, दुश्मन, षड्यंत्रकारी सभी निष्फल हो जाते हैं। नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा मिलती है।
6. आध्यात्मिक उन्नति
भैरव उपासना से आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है। मोक्ष की इच्छा रखने वालों, तंत्र साधना करने वालों के लिए यह पूजा विशेष फलदायी है।
कब करानी चाहिए नवग्रह शांति भैरव पूजा? जाने शुभ मुहूर्त
यह पूजा विशेष रूप से निम्नलिखित समयों में अत्यंत लाभदायक होती है:
- शनि अमावस्या — शनि के प्रभाव से मुक्ति के लिए सर्वोत्तम
- भैरव अष्टमी — प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि
- शिवरात्रि — महाशिवरात्रि या मासिक शिवरात्रि
- ग्रहण काल — सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय
- अपनी जन्मतिथि — जन्मदिन पर यह पूजा कराना अत्यंत शुभ
- नवरात्रि — चैत्र या शारदीय नवरात्रि के दिनों में
- जब ग्रह दशा खराब चल रही हो — विशेष रूप से शनि, राहु, केतु की महादशा में
नवग्रह शांति भैरव पूजा की विधि क्या है? कैसे होती है यह पूजा?
आवश्यक सामग्री
- नवग्रह यंत्र, नवग्रह मूर्तियाँ या प्रतिमाएँ
- भैरव मूर्ति/यंत्र/फोटो
- नवग्रह सामग्री (जौ, तिल, मूंग, मसूर, चना, गेहूँ, चावल, उड़द, कुलथी)
- भैरव सामग्री (शराब या शुद्ध जल, नारियल, काले तिल, काला वस्त्र, काली उड़द, रूई का दीपक)
- पंचामृत, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी
- काले कपड़े में लपेटकर रखी नारियल की गरी (भैरव के लिए)
- नवग्रह एवं भैरव मंत्र युक्त पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य
- रुद्राक्ष माला, काले धागे की माला
नवग्रह शांति भैरव पूजा की विधि
संकल्प: सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर ब्राह्मण या पंडित जी के साथ संकल्प लें। अपना नाम, गोत्र, राशि, नक्षत्र बोलकर पूजा का संकल्प करें।
नवग्रह स्थापना: नवग्रह यंत्र या मूर्तियों को पंचामृत से स्नान कराकर विधिवत स्थापित करें। प्रत्येक ग्रह को उनके संबंधित वस्त्र, रंग, फल, मिष्ठान्न अर्पित करें।
नवग्रह मंत्रों का जप:
- सूर्य — ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
- चंद्र — ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः
- मंगल — ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
- बुध — ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
- गुरु — ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
- शुक्र — ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
- शनि — ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
- राहु — ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
- केतु — ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
भैरव स्थापना: भैरव मूर्ति या यंत्र को स्थापित करें। काले तिल, काली उड़द, नारियल की गरी, काले वस्त्र अर्पित करें। भैरव मंत्रों का जप करें।
मुख्य भैरव मंत्र:
- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं ह्रः फट् भैरवाय नमः
- ॐ भैरवाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नो भैरवः प्रचोदयात्
- ॐ कालभैरवाय नमः
- अष्टांग भैरव मंत्र (यदि संभव हो तो)
हवन: नवग्रह और भैरव दोनों की आहुतियाँ दी जाएँ। गाय के घी, नवग्रह समिधा, और भैरव के लिए काली उड़द, तिल, शहद की आहुतियाँ देना विशेष फलदायी है।
आरती एवं पूर्णाहुति: दोनों देवताओं की आरती करें, ब्राह्मण भोज कराएँ, दान-दक्षिणा दें।
कुछ विशेष बातें जो ध्यान रखनी चाहिए
- शुद्धता: पूजा के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें, मांसाहार और नशा से दूर रहें।
- समय: प्रातःकाल या सायंकाल पूजा कराना उत्तम है। रात्रि में भी भैरव पूजा की जा सकती है।
- मंत्र उच्चारण: मंत्रों का उच्चारण शुद्ध होना चाहिए। इसलिए अनुभवी पंडित से ही पूजा कराएँ।
- भावना: पूजा में श्रद्धा और विश्वास का विशेष महत्व है।
- दान: पूजा के बाद ब्राह्मण, गरीब, अंधे, विकलांग को दान अवश्य करें।
कुंडली में किन दोषों पर यह पूजा विशेष रूप से की जाती है?
- कालसर्प दोष — राहु-केतु की पीड़ा से मुक्ति
- पितृ दोष — पूर्वजों की कृपा प्राप्ति
- गुरु चांडाल दोष — गुरु-राहु की युति से उत्पन्न दोष
- शनि की साढ़ेसाती/ढाईया — शनि के कठिन प्रभाव में राहत
- मंगल दोष/कुज दोष — विवाह में बाधा दूर करना
- अंगारक दोष — मंगल-राहु की युति से उत्पन्न दोष
- ग्रहण दोष — ग्रहण युक्त कुंडली वालों के लिए
व्यक्तिगत अनुभव एवं प्राचीन मान्यताएँ
काशी में भगवान कालभैरव को “कोटवाल” कहा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति काशी में भैरवजी की पूजा करके निकलता है, उसे कभी भी ग्रह दोष नहीं लगता। प्राचीन ग्रंथों में वर्णन है कि भगवान भैरव की पूजा से समस्त ग्रह शांत हो जाते हैं। नवग्रह शांति के साथ जब भैरव पूजा की जाती है, तो यह “ग्रह शमन + रक्षा कवच” दोनों का कार्य करती है।
उज्जैन में नवग्रह शांति भैरव पूजा की बुकिंग कैसे करें?
नवग्रह शांति भैरव पूजा को विधिवत और शास्त्रोक्त विधि से कराना अत्यंत आवश्यक है। अनुभवी ज्योतिषी मयंक शर्मा जी की सलाह से अपनी कुंडली का विश्लेषण कराकर ही पूजा कराएँ, ताकि अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके और सभी समस्याओं से छुटकारा मिलें, अभी कॉल करें।