किसी भी व्यक्ति के जीवन पर ग्रहो का विशेष प्रभाव पड़ता है। हमारा भाग्य ग्रहो की स्थिति पर बहुत अधिक निर्भर होता है। ग्रहो के साथ साथ कुछ छाया ग्रह भी होते है, जो अगर शुभ स्थिति मे न हो तो व्यक्ति के जीवन को संघर्षमय बना देता है। जीवन के हर क्षेत्र मे असफलता मिलना केवल संयोग नहीं हो सकता है, इसका कारण कुंडली मे केतु की स्थिति का सही न होना हो सकता है। केतु की सही स्थिति का न होने के कारण कुंडली मे केतु दोष बनता है। आज इस लेख के माध्यम से जानेंगे की केतु दोष क्या होता है? केतु दोष के लक्षण क्या है और दूर करने के लिए कौनसे उपाय करने चाहिए।
केतु दोष क्या है?
केतु एक छाया ग्रह है। जो हमारी व्यक्ति के जीवन मे भाग्य को निर्धारित करता है। छाया ग्रह अदृश्य रूप से कुंडली मे उपस्थित होते है। जब केतु कुंडली मे अशुभ स्थान पर होता है, या दूसरे ग्रह के साथ सही स्थिति मे न हो तो केतु दोष बनता है। यह दोष पिछले जन्म के कर्मो के पाप के कारण भी यह दोष बनता है।
केतु दोष के लक्षण
केतु दोष के निम्नलिखित लक्षण है-
- मन एकाग्र नहीं रहता है।
- पति पत्नी के बीच सही संबंध नहीं रहते है।
- परिश्रम करने के पश्चात भी सफलता नहीं मिलती है।
- मानसिक तनाव रहता है।
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याओ का सामना करना पड़ता है।
- व्यक्ति स्वयं को अकेला समझता है।
- परिवार मे लड़ाई झगड़े का माहौल रहता है।
- यात्रा मे बाधाए या घटनाए होती है।
केतु शांति मंत्र
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः।
प्रतिदिन स्नान के पश्चात 108 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
मंत्र जाप के नियम
- सूर्योदय या सूर्यास्त के बाद मंत्र जाप करना चाहिए।
- जाप किसी पवित्र स्थल या मंदिर पर ही करना चाहिए।
- घर के मंदिर मे भी यह जाप किया जा सकता है।
- जाप के दौरान रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना चाहिए।
- भगवान गणेश या केतु देव की मूर्ति या तस्वीर के सामने यह जाप करना चाहिए।
केतु दोष के उपाय
केतु दोष के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए निम्नलिखित उपायो को अपनाना चाहिए।
- केतु शांति मंत्र का जाप करना चाहिए।
- भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए।
- गणेश चालीसा का पाठ करना चाहिए।
- काला तिल, कंबल, नीले वस्त्र या लोहे की वस्तुओ का दान करना चाहिए।
- मंगलवार और शनिवार को बहते जुए जल मे नारियल प्रवाहित करना चाहिए।
- कुत्ते को और कौऔ को रोटी खिलाना लाभकारी माना जाता है।
केतु शांति पूजा
केतु शांति पूजा एक विशेष पूजा अनुष्ठान है, जिसे अनुभवी और विद्वान पंडित जी के द्वारा ही करवानी चाहिए। केतु शांति पूजा केतु के अशुभ प्रभाव को सदैव के लिए समाप्त करने और जीवन मे सकरात्मकता आती है। यह पूजा विशेष मंत्रो, विधियो और हवन के माध्यम से सम्पन्न की जाती है। पूजा करने से केतु दोष से मुक्ति मिल जाती है।
केतु शांति पूजा कैसे की जाती है?
पूजा की प्रक्रिया निम्नलिखित है-
- पूजा से पहले स्नान करना चाहिए।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।
- पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र किया जाता है।
- पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से की जाती है।
- केतु मंत्र का जाप किया जाता है।
- गंगाजल या पंचामृत से अभिषेक किया जाता है।
- मंत्र जाप और अभिषेक के बाद हवन किया जाता है।
- पूजा के बाद दान करना आवश्यक होता है।
केतु शांति पूजा से लाभ
केतु शांति पूजा से होने वाले लाभ निम्नलिखित है-
- मन एकाग्र रहता है।
- स्वास्थ ठीक रहता है।
- बीमारियो और रोगो से मुक्ति मिल जाती है।
- संतान प्राप्ति मे आ रही समस्या समाप्त होती है।
- आत्मविश्वास बढ़ता है।
केतु शांति पूजा उज्जैन मे क्यो कराये?
मान्यता है की उज्जैन बाबा महाकाल की नगरी है, यहां पर किसी भी प्रकार की पूजा को करने से उसका असंख्य गुना फल मिलता है। यहा पर की गयी पूजा से से शीघ्र ही दोषो से मुक्ति मिल जाती है, जिससे जीवन मे सुख शांति आती है।
केतु शांति पूजा खर्च
पूजा की लागत पूजा की सामग्री पर निर्भर करती है। यदि आप सामग्री की व्यवस्था स्वयं करते है, तो पूजा का खर्च कम हो जाता है। किन्तु आप पूजा की सामग्री की व्यवस्था नहीं कर पा रहे है तो पूजा सामग्री की पूरी व्यवस्था पंडित जी द्वारा कर ली जाती है। जिसके कारण पूजा का खर्च बढ़ जाता है। पंडित जी से संपर्क करके आप पूजा मे आने वाले खर्च के बारे मे समस्त जानकारी प्राप्त कर सकते है।
केतु शांति पूजा कैसे बुक करे?
केतु दोष से मुक्ति पाने के लिए केतु शांति पूजा की जाती है। केतु शांति पूजा करवाने के लिए आप पंडित मयंक शर्मा जी से संपर्क कर सकते है। पंडित जी को 9 वर्षो से अधिक समय से केतु दोष, मंगल दोष और अन्य दोषो को दूर करने के लिए की जानी वाली पूजाओ का अनुभव प्राप्त है। पूजा बुक करने के लिए नीचे दी हुयी बटन पर अभी क्लिक करके पंडित जी से संपर्क