कुंडली मे ग्रहो की स्थिति का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन पर भी पड़ता है। जीवन मे कभी कभी ऐसा आभास होता है, की कोशिश करने के बाद भी सही परिणाम नहीं मिलते है। शनि और केतु की सही स्थिति न होने पर कुंडली मे शनि केतु श्रापित दोष जीवन मे कई समस्याओ का कारण बनता है। यह दोष कर्मो और ग्रहो के बंधन से जुड़ा होता है। आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे की शनि केतु श्रापित दोष क्या है और इसे किस प्रकार दूर किया जा सकता है?
कुंडली मे शनि केतु श्रापित दोष कैसे बनता है?
शनि और केतु के संयुक्त प्रभाव के कारण शनि केतु श्रापित दोष बनता है। यह दोष व्यक्ति के जीवन पर बहुत नकारात्मक प्रभाव डालता है। कुंडली मे शनि केतु श्रापित दोष कई कारणो से बनता है। कुंडली मे दोष निम्न कारणो से भी बनता है-
- शनि और केतु 12 भावो मे से किसी एक भाव मे स्थित हो।
- शनि और केतु एक दूसरे पर दृष्टि डालते हो।
- शनि और राहु का आपस मे संबंध हो और उन दोनो ग्रहो पर केतु की दृष्टि हो।
- जब शनि और केतु अपनी नीच स्थिति मे हो या कमज़ोर हो।
- शनि और केतु पर अन्य पाप ग्रह राहु या मंगल का प्रभाव हो तो दोष का दुष्प्रभाव बढ़ जाता है।
- पिछले जन्म मे किए गए कर्मो के परिणाम स्वरूप भी यह दोष कुंडली मे बनता है।
शनि केतु श्रापित दोष के कारण किन समस्याओ का सामना करना पड़ता है?
शनि केतु श्रापित दोष के कारण निम्न समस्याओ का सामना करना पड़ता है-
- बार बार धन की हानि होना।
- आर्थिक अस्थिरता का होना।
- व्यक्ति खुद को कमजोर महसूस करता है।
- पति पत्नी के बीच लड़ाई झगड़े होते है।
- पारिवारिक कलह और तनाव।
- करियर मे अस्थिरता होना।
- व्यवसाय मे घाटे का सामना करना।
- स्वास्थ्य संबधी समस्याओ का सामना करना पड़ता है।
- परिश्रम के पश्चात भी सफलता नहीं मिलती है।
यदि कोई व्यक्ति निम्न मे से किसी समस्या का सामना लगातार कर रहा हो, तो उसे कुंडली के जाच कर इस बात का पता लगाना चाहिए की कुंडली मे यह दोष है या नहीं।
शनि केतु युति के उपाय-
दोष के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए निम्नलिखित उपायो को अपना सकते है-
- शनि मंत्र का जाप करना चाहिए।
- शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए।
- हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
- केतु मंत्र का जाप करना चाहिए।
- शनिवार के दिन व्रत रखना चाहिए।
- रुद्राभिषेक करना चाहिए।
- गरीबो और जरूरतमन्द लोगो को अन्न, वस्त्र या काले तिल का दान करना चाहिए।
शनि केतु श्रापित दोष शांति मंत्र
शनि मंत्र – ॐ शं शनैश्चराय नमः”
केतु मंत्र – ॐ कें केतवे नमः
प्रतिदिन स्नान करने के बाद इन मंत्रो का जाप करना चाहिए।
शनि केतु श्रापित दोष पूजा का महत्व क्या है?
शनि केतु श्रापित दोष पूजा ज्योतिष शास्त्र मे की जाने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। शनि केतु श्रापित दोष और इसके दुष्प्रभाव को सदैव के लिए समाप्त करने हेतु यह पूजा की जाती है। पूजा करने से शनि और केतु ग्रहो के अशुभ और नकारात्मक प्रभाव मे कमी आती है। यह पूजा करने से न केवल दोष समाप्त होता है तथा साथ ही जीवन मे सुख, शांति और समृद्धि मे वृद्धि होती है।
शनि केतु श्रापित दोष निवारण पूजा से लाभ क्या लाभ होते है?
पूजा के पश्चात होने वाले लाभ निम्नलिखित है-
- दोष के कारण उत्पन्न आर्थिक समस्या समाप्त होती है।
- मानसिक और शारीरिक स्वस्थ सही होता है।
- करियर मे आने वाली सभी समस्याए दूर हो जाती है।
- व्यापार मे तरक्की होती है।
- दंपत्ती के बीच मधुर संबंध स्थापित होते है।
पूजा मे कितना समय और खर्च लगता है?
इस पूजा को करने मे समान्यतः 4 से 5 घंटे लगते है। पूजा पूर्ण पंचाग कर्म और रुद्राभिषेक के साथ की जाती है। पंडित जी का उद्देश्य है की सभी लोगो को दोष से मुक्ति मिले और सभी वर्ग के लोग यह पूजा करवा सके इसलिए शनि केतु श्रापित दोष पूजा कम से कम खर्च मे पंडित मयंक शर्मा जी द्वारा की जाती है।
शनि केतु श्रापित दोष पूजा कैसे बुक करे?
शनि केतु श्रापित दोष से मुक्ति पाने के लिए शनि केतु श्रापित दोष पूजा की जाती है। शनि केतु श्रापित दोष पूजा करवाने के लिए आप पंडित मयंक शर्मा जी से संपर्क कर सकते है। पंडित जी को 9 वर्षो से अधिक समय से शनि केतु श्रापित दोष, मंगल दोष और अन्य दोषो को दूर करने के लिए की जानी वाली पूजाओ का अनुभव प्राप्त है। पूजा बुक करने के लिए नीचे दी हुयी बटन पर अभी क्लिक करके पंडित जी से संपर्क कर सकते है, और अपनी समस्याओ से मुक्ति पा सकते है।