सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा उज्जैन

सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा उज्जैन में कैसे और कब कराएं

सर्व सिद्धि का अर्थ क्या होता है?

सिद्धि का अर्थ है — सफलता, पूर्णता, प्राप्ति। जब कोई काम पूरी तरह से पूर्ण हो जाए, जब कोई मनोकामना पूरी तरह से साकार हो जाए, उसे सिद्धि कहते हैं।

लेकिन सर्व सिद्धि का अर्थ है — सभी सिद्धियों की प्राप्ति। धन की सिद्धि, स्वास्थ्य की सिद्धि, विद्या की सिद्धि, भक्ति की सिद्धि, मोक्ष की सिद्धि। एक साथ। एक साथ। एक ही अनुष्ठान में।

आठ प्रकार की सिद्धियां कौन-कौन सी होती है?

हिंदू धर्म में आठ महासिद्धियों का वर्णन है। जिन्हें अष्टसिद्धि कहा जाता है।

  • अणिमा — अपने शरीर को अणु जितना छोटा कर लेना। यह केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक भी है। अपने अहंकार को छोटा करना, अपनी समस्याओं को छोटा देखना। सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा से यह सिद्धि प्राप्त होती है।
  • महिमा — अपने शरीर को विशाल बनाना। यह भी मानसिक है। अपने आत्मविश्वास को बढ़ाना, अपनी क्षमता को पहचानना। हनुमान जी ने लंका में अपना विशाल रूप दिखाया था — यही महिमा सिद्धि है।
  • गरिमा — भारी हो जाना। अपने वजन को बढ़ाना। यह धैर्य और स्थिरता का प्रतीक है। जो व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अपनी स्थिति नहीं खोता, उसे गरिमा सिद्धि प्राप्त होती है।
  • लघिमा — हल्का हो जाना। अपने शरीर को पंख की तरह हल्का बनाना। यह चिंता मुक्ति का प्रतीक है। जो व्यक्ति चिंताओं से मुक्त होकर जीवन जीता है, उसे लघिमा सिद्धि प्राप्त होती है।
  • प्राप्ति — कुछ भी प्राप्त कर लेना। जो चाहो, वो मिल जाए। यह इच्छा शक्ति का प्रतीक है। हनुमान जी ने संजीवनी बूटी प्राप्त की — यही प्राप्ति सिद्धि है।
  • प्राकाम्य — जो चाहो, वो कर लो। इच्छानुसार कार्य करना। यह संकल्प शक्ति का प्रतीक है। हनुमान जी ने लंका दहन किया — यही प्राकाम्य सिद्धि है।
  • ईशित्व — सब पर शासन करना। यह आत्म नियंत्रण का प्रतीक है। जो व्यक्ति अपने मन, वचन और कर्म पर नियंत्रण रखता है, वो ईशित्व सिद्धि का अधिकारी होता है।
  • वशित्व — सब को वश में करना। यह प्रेम और करुणा का प्रतीक है। जो व्यक्ति प्रेम से सब को अपना बना लेता है, वो वशित्व सिद्धि का अधिकारी होता है।

सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा इन सभी आठ सिद्धियों की कुंजी है।

हनुमान जी: सर्व सिद्धि के स्वामी क्यों माने जाते है?

हनुमान जी ने अपने जीवन में हर सिद्धि प्राप्त की।

  • बचपन में सूर्य को फल समझकर खाने गए — यह अणिमा।
  • लंका में विशाल रूप धारण किया — यह महिमा।
  • समुद्र पर पहाड़ उठाकर लाए — यह गरिमा।
  • आकाश में उड़कर संजीवनी लाए — यह लघिमा।
  • मृत लक्ष्मण को जीवित किया — यह प्राप्ति।
  • रामायण युद्ध में रावण का वध कराया — यह प्राकाम्य।
  • राम नाम का गुणगान किया — यह ईशित्व।
  • सब भक्तों को अपना बनाया — यह वशित्व।

इसीलिए हनुमान जी को अष्टसिद्धि के स्वामी कहा जाता है। और जो व्यक्ति हनुमान जी की पूजा करता है, उसे ये सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

हनुमान जी और नवग्रहों का रहस्य क्या है?

हनुमान जी ने नवग्रहों को मुक्त कराया था। इसीलिए नवग्रह हनुमान जी के ऋणी हैं। जब आप हनुमान जी की पूजा करते हैं, तो नवग्रह स्वतः प्रसन्न हो जाते हैं। आपको अलग-अलग ग्रहों की पूजा करने की आवश्यकता नहीं रहती।

सूर्य के बेटे हैं हनुमान जी। चंद्रमा के भाई हैं। मंगल के अवतार हैं। बुध के मित्र हैं। गुरु के प्रिय हैं। शुक्र के रक्षक हैं। शनि के देवता हैं। राहु-केतु के स्वामी हैं। एक हनुमान जी की पूजा में सभी नवग्रहों की पूजा समाहित है। पूजा अनुष्ठान के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उज्जैन के श्रेष्ठ पंडित मयंक शर्मा जी से संपर्क करें।

सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा की विधि और मंत्र क्या है?

41 दिनों का संकल्प

सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा से पहले 41 दिनों का व्रत और साधना अनिवार्य है। यह 41 दिन एक मंडल कहलाते हैं। एक मंडल में शरीर की कोशिकाएं पूरी तरह बदल जाती हैं। आपका शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर ऊपर उठता है।

दिन 1 से 10: शारीरिक शुद्धि

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। यह समय सुबह 4 से 5 बजे के बीच का होता है। इस समय पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र सबसे शांत होता है। मंत्र जाप का प्रभाव इस समय सबसे अधिक होता है।
  • नीम के पत्ते या गंगाजल डालकर स्नान करें।
  • सफेद या लाल वस्त्र धारण करें।
  • भोजन में सात्विकता का विशेष ध्यान रखें। मांसाहार, लहसुन, प्याज, अंडा, शराब, और नशा पूर्णतः त्याग दें।
  • दिन में दो बार भोजन करें — एक दोपहर में और एक रात्रि में। रात्रि भोजन सूर्यास्त से पहले कर लें।
  • रोजाना कम से कम 108 बार हनुमान मंत्र का जाप करें। मुख्य मंत्र है — ॐ हं हनुमते नमः

दिन 11 से 20: मानसिक शुद्धि

इस चरण में मन को शांत करने पर ध्यान दें। रोजाना 15 मिनट ध्यान करें। ध्यान की विधि सरल है। एकांत में बैठें। आंखें बंद करें।

इस चरण में हनुमान चालीसा का पाठ नियमित रूप से करें। हनुमान चालीसा 40 चौपाइयों का ग्रंथ है। प्रत्येक चौपाई एक विशेष सिद्धि का वर्णन करती है। 40 दिन तक नियमित पाठ से ये सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

दिन 21 से 30: आत्मिक शुद्धि

इस चरण में अपने कर्मों पर ध्यान दें। रोजाना कम से कम एक अच्छा काम करें। किसी गरीब को भोजन कराएं। किसी बीमार की सेवा करें। किसी जरूरतमंद की मदद करें। गाय को हरा चारा खिलाएं। चींटियों को आटा या शक्कर डालें। ये सब कर्म हनुमान जी को प्रसन्न करते हैं।

दिन 31 से 41: संकल्प की दृढ़ता

इस चरण में अपने संकल्प को और दृढ़ करें। हर सुबह उठकर कहें — “हे हनुमान जी, मैं आपकी शरण में हूं। मेरी यह मनोकामना पूरी करें।” यह मनोकामना धर्म के अनुकूल होनी चाहिए।

सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा की मुख्य विधि क्या है?

पूजा का समय और स्थान

  • सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय मंगलवार और शनिवार है। मंगलवार हनुमान जी का प्रिय दिन है। शनिवार शनि देव का दिन है, और हनुमान जी शनि के देवता हैं। इन दोनों दिनों में पूजा का विशेष फल मिलता है।
  • ब्रह्म मुहूर्त में पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। यह समय सुबह 4 से 5 बजे के बीच का होता है। इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सर्वाधिक होता है। मंत्र जाप और पूजा का प्रभाव इस समय सबसे अधिक होता है।
  • पूजा का स्थान पूर्व दिशा में होना चाहिए। पूर्व दिशा सूर्य की दिशा है। और हनुमान जी सूर्य के पुत्र हैं। इसलिए पूर्व दिशा में मुंह करके पूजा करने से विशेष फल मिलता है।

पूजा सामग्री

नए लाल या सफेद कपड़े पहनें। हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। मूर्ति चांदी, पीतल, या पत्थर की हो सकती है। तस्वीर में हनुमान जी का बजरंगी रूप या पंचमुखी रूप होना चाहिए।

चंदन, रोली, मोली, अक्षत, फूल, धूप, दीपक, नैवेद्य, और पंचामृत की व्यवस्था करें। चंदन हनुमान जी को प्रिय है। रोली और मोली पूजा की शुभता का प्रतीक हैं। अक्षत समृद्धि का प्रतीक है। फूल भक्ति का प्रतीक हैं। धूप और दीपक ज्ञान और तेज का प्रतीक हैं। नैवेद्य प्रेम का प्रतीक है। पंचामृत पंच तत्वों का प्रतीक है।

पूजा की विधि

  • संकल्प: हाथ में जल, अक्षत, और फूल लें। अपना नाम, गोत्र, राशि, नक्षत्र बोलें।
  • गणपति पूजन : गणेश जी को याद करें। उनके सामने मोदक या लड्डू रखें। दूर्वा घास अर्पित करें। गणेश जी की पूजा हर अनुष्ठान की शुरुआत में होती है क्योंकि वो बाधाओं के हर्ता हैं।
  • गुरु वंदना: अपने गुरु या ईष्ट देवता को याद करें। गुरु बिना ज्ञान नहीं। और ज्ञान बिना सिद्धि नहीं।
  • हनुमान जी का अभिषेक: पंचामृत से हनुमान जी का अभिषेक करें। पंचामृत में दूध, दही, शहद, घी, और शक्कर होती है। ये पांच तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, और आकाश का प्रतीक हैं।
  • मुख्य मंत्र जाप: सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा का मुख्य मंत्र है — ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा।
  • हनुमान चालीसा का पाठ: हनुमान चालीसा का पाठ सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा का अभिन्न अंग है। 40 चौपाइयों में हनुमान जी की महिमा, शक्ति, और कृपा का वर्णन है। प्रत्येक चौपाई एक विशेष सिद्धि का बीज है।
  • नैवेद्य और प्रसाद: हनुमान जी को लड्डू, बूंदी, या गुड़ का भोग लगाएं। हनुमान जी को मीठा बहुत प्रिय है।

सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा के अद्भुत लाभ कौन-कौन से है?

  1. धन की सिद्धि: जो व्यक्ति नियमित रूप से सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा करता है, उसके जीवन में धन की कमी नहीं रहती। व्यापार में वृद्धि, नौकरी में प्रमोशन, अप्रत्याशित लाभ — ये सब हनुमान जी की कृपा से होता है।
  2. स्वास्थ्य की सिद्धि: हनुमान जी को बजरंगी कहा जाता है। बजरंग का अर्थ है — वज्र के समान शरीर। हनुमान जी की पूजा करने से शरीर में वज्र जैसी शक्ति आती है।
  3. विद्या की सिद्धि: हनुमान जी को वीर हनुमान कहा जाता है। वीर का अर्थ है — ज्ञान और बल का संगम। हनुमान जी की पूजा करने से मन एकाग्र होता है।
  4. रक्षा की सिद्धि: हनुमान जी को रक्षक कहा जाता है। उनकी पूजा करने से अदृश्य रक्षा कवच बन जाता है। शत्रुओं का डर समाप्त होता है।
  5. वाक् सिद्धि: हनुमान जी को वाग्मी कहा जाता है। उनकी पूजा से वाणी में मधुरता आती है। बोलने की कला विकसित होती है।
  6. संतान सिद्धि: हनुमान जी को संतान के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। उनकी पूजा से संतान प्राप्ति में कठिनाई दूर होती है। गर्भावस्था सुखद रहती है।
  7. सम्पूर्ण सिद्धि: जब एक साथ धन, स्वास्थ्य, विद्या, भक्ति, रक्षा, वाक्, मित्र, पराक्रम, संतान, और मोक्ष — ये सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं, तो उसे सम्पूर्ण सिद्धि कहा जाता है। यही सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा का अंतिम लक्ष्य है।

उज्जैन में सर्व सिद्धि प्राप्ति हनुमान पूजा कराने के लिए संपर्क कैसे करें?

यदि आप अपने जीवन में वह पूर्णता और सिद्धि चाहते हैं जो आपका अधिकार है, तो इस पूजा को श्रद्धा और विश्वास के साथ संपन्न कराएँ। हनुमान जी की कृपा से आपके जीवन के सभी संकट टल जाएंगे और सर्व सिद्धि आपके चरणों में होगी। उज्जैन में यह पूजा सम्पन्न कराने के लिए अनुभवी पंडित मयंक शर्मा जी से आज ही नीचे दिये गए नंबर पर संपर्क करें।

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