बालाजी कृपा प्राप्ति हवन और पंचमुखी बालाजी पूजा एक अत्यंत शक्तिशाली अनुष्ठान है जो भक्त की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण कर सकता है। यदि आप जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या से जूझ रहे हैं — चाहे वह आर्थिक हो, स्वास्थ्य संबंधी हो, पारिवारिक हो या आध्यात्मिक — तो उज्जैन में इस पवित्र अनुष्ठान से निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।
पंचमुखी बालाजी कौन हैं?
पाँच मुखों का रहस्य
पंचमुखी हनुमान जी — अर्थात पाँच मुखों वाले भगवान हनुमान। यह रूप भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी को पाताल लोक से मुक्त कराने के लिए धारण किया गया था।
रावण का भाई अहिरावण एक शक्तिशाली राक्षस था जिसने श्री राम और लक्ष्मण जी को पाताल लोक में बंदी बना लिया था। अहिरावण को मारने का केवल एक ही उपाय था — पाँच दिशाओं में जलती पाँच दीपक एक साथ बुझानी होंगी। इसीलिए भगवान हनुमान ने पंचमुखी रूप धारण किया।
- पूर्व मुख — श्री हनुमान — भक्ति और शक्ति का प्रतीक, साधकों को आशीर्वाद देने वाले
- दक्षिण मुख — नरसिंह — भगवान विष्णु का अवतार, अत्याचारियों का नाश करने वाले, भक्तों की रक्षा करने वाले
- पश्चिम मुख — गरुड़ — विष्णु जी के वाहन, सर्पों और नागों का भय दूर करने वाले, रोगों से मुक्ति दिलाने वाले
- उत्तर मुख — वराह — भगवान विष्णु का वराह अवतार, पृथ्वी को समुद्र से उबारने वाले, धन-संपत्ति प्रदान करने वाले
- ऊपर मुख — हयग्रीव — ज्ञान और विद्या के देवता, मोक्ष प्रदान करने वाले, आध्यात्मिक उन्नति देने वाले
इन पाँचों मुखों की एक साथ उपासना से साधक को पाँचों दिशाओं से सुरक्षा, ज्ञान, धन, शक्ति और मोक्ष — सभी प्राप्त होते हैं।
पंचमुखी बालाजी पूजा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भूत, प्रेत, पिशाच, राक्षस और सभी नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति प्राप्त करना है। यह पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए की जाती है जो —
किसी अज्ञात शक्ति से परेशान हैं। किसी ने तंत्र-मंत्र या काला जादू किया है। घर में अजीब घटनाएँ हो रही हैं। परिवार में लगातार दुर्भाग्य आ रहा है। संतान या जीवनसाथी पर बाधा है। व्यवसाय या नौकरी में अचानक गिरावट आ रही है। किसी ने नज़र लगाई है। श्मशान, मसान या अन्य अशुभ स्थान से प्रभावित हैं।
पंचमुखी बालाजी पूजा के प्रकार और विधि क्या है?
पंडित मयंक शर्मा जी विक्रांत भैरव शमशान पीठ में तीन स्तरों पर पंचमुखी बालाजी पूजा संपन्न करवाते हैं। प्रत्येक स्तर की अपनी विशेष विधि, समय और शक्ति है।
सामान्य पंचमुखी बालाजी पूजा (हवन)
यह सबसे प्रारंभिक और किफायती स्तर है जो हल्की बाधाओं और नियमित कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है।
विधि और प्रक्रिया
पूजा की शुरुआत शिप्रा नदी में पवित्र स्नान या मंदिर परिसर में जल अभिषेक से होती है। पंडित मयंक शर्मा जी भक्त का नाम, गोत्र और जन्म विवरण लेकर संकल्प दिलाते हैं। संकल्प में यह घोषणा की जाती है कि यह पूजा भूत-प्रेत बाधा मुक्ति और बालाजी कृपा प्राप्ति हेतु की जा रही है।
- भगवान गणेश की पूजा सभी बाधाएँ दूर करने हेतु की जाती है। फूल, कुमकुम, चावल और मोदक का भोग लगाया जाता है।
- नवग्रह पूजन होता है — विशेष रूप से शनि ग्रह और राहु-केतु की शांति, क्योंकि ये ग्रह भूत-प्रेत बाधा के मुख्य कारक माने जाते हैं।
- पंचमुखी बालाजी की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। पाँच मुखों में से प्रत्येक मुख को अलग-अलग मंत्रों से आह्वान किया जाता है —
- पूर्व मुख हनुमान — “ॐ हं हनुमते नमः” दक्षिण मुख नरसिंह — “ॐ क्ष्रां क्ष्रीं क्ष्रौं सः नरसिंहाय नमः” पश्चिम मुख गरुड़ — “ॐ गं गरुड़ाय नमः” उत्तर मुख वराह — “ॐ वं वराहाय नमः” ऊपर मुख हयग्रीव — “ॐ ह्रीं हयग्रीवाय नमः”
- हनुमान चालीसा का 11 बार पाठ किया जाता है। प्रत्येक चौपाई के साथ एक लाल चंदन की आहुति दी जाती है। बालाजी बीज मंत्र “ॐ हं हनुमते नमः” का 108 बार जाप किया जाता है।
- हवन में घी, तिल, चावल, लाल चंदन, बेलपत्र, कुंकुम और विशेष समिधा की आहुतियाँ दी जाती हैं। हवन का धुआँ भक्त के ऊपर से ले जाया जाता है ताकि वह बालाजी की कृपा से सीधे लाभान्वित हो।
- आरती और प्रसाद — भक्ति भरी हनुमान आरती की जाती है। बूंदी के लड्डू और केले का प्रसाद वितरित किया जाता है। भक्त को पंचमुखी हनुमान यंत्र और रक्षा कवच दिया जाता है।
समय और खर्च
इस पूजा में 1 घंटे का समय लगता है। खर्च तीन विकल्पों में उपलब्ध है —
- ₹3,500 — मानक पूजा, मूल मंत्र जाप, छोटा हवन, प्रसाद
- ₹5,500 — विस्तृत पूजा, 21 बार हनुमान चालीसा, मध्यम हवन, प्रसाद, यंत्र
- ₹7,500 — विशेष पूजा, 51 बार हनुमान चालीसा, बड़ा हवन, प्रसाद, यंत्र, रक्षा कवच
सभी सामग्री और पंडित जी की दक्षिणा इसी खर्च में शामिल है। कोई अतिरिक्त खर्च नहीं। यह एक अनुमानित खर्च है पूजा का सटीक खर्च जानने के लिए आज ही उज्जैन के अनुभवी तांत्रिक मयंक शर्मा जी से संपर्क करें।
विशेष पंचमुखी बालाजी हवन पूजा (तांत्रिक विधि) क्या है?
यह मध्यम स्तर है जो मध्यम से गंभीर बाधाओं के लिए किया जाता है। इसमें विशेष तांत्रिक पद्धति का प्रयोग किया जाता है जो सामान्य पूजा से कई गुना अधिक प्रभावी मानी जाती है।
विशेष तांत्रिक विधि
इस पूजा में विक्रांत भैरव शमशान पीठ की विशेष ऊर्जा का पूर्ण उपयोग किया जाता है। पंडित मयंक शर्मा जी रात्रि कालीन अनुष्ठान का आयोजन करते हैं जो दिन के अनुष्ठान से अधिक शक्तिशाली होता है।
श्मशान सामग्री का प्रयोग — इस विधि में विशेष श्मशान सामग्री जैसे काले तिल, उड़द, श्मशान की मिट्टी, विशेष जड़ी-बूटियाँ और तांत्रिक समाग्री का उपयोग किया जाता है। यह सामग्री सामान्य पूजा में प्रयोग नहीं होती।
पंचमुखी बालाजी की तांत्रिक साधना — पाँचों मुखों की अलग-अलग तांत्रिक मुद्राओं में पूजा की जाती है। प्रत्येक मुख के लिए विशेष बीज मंत्र और तांत्रिक कवच का जाप किया जाता है।
- विशेष हवन — इस हवन में 108 आहुतियाँ नहीं, बल्कि 1008 आहुतियाँ दी जाती हैं। प्रत्येक आहुति के साथ तांत्रिक बीज मंत्र का उच्चारण होता है। हवन की अग्नि श्मशान की अग्नि से प्रज्वलित की जाती है जो अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है।
- भूत-प्रेत मुक्ति मंत्र — इस विधि में विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है जो सीधे भूत-प्रेत शक्तियों को नष्ट करते हैं —
- “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः पंचमुखाय हनुमते रक्ष रक्ष मां भूत प्रेत पिशाच बाधा निवारणाय स्वाहा”
- रात्रि जागरण — इस पूजा में रात्रि भर जागरण किया जाता है। पूरे रात हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और हनुमान बाहुक का पाठ होता है। भक्त को भी रात्रि भर जागकर पूजा में भाग लेना होता है।
समय और खर्च
इस पूजा में डेढ़ घंटे का समय लगता है। खर्च दो विकल्पों में उपलब्ध है —
- ₹11,500 — मानक विशेष हवन, तांत्रिक विधि, 1008 आहुतियाँ, रात्रि जागरण, प्रसाद, यंत्र, रक्षा कवच
- ₹15,500 — विस्तृत विशेष हवन, उन्नत तांत्रिक विधि, 2100 आहुतियाँ, रात्रि जागरण, विशेष प्रसाद, सिद्ध यंत्र, रक्षा कवच, 21 दिनों का अनुष्ठान
सभी सामग्री, तांत्रिक समाग्री और पंडित जी की दक्षिणा इसी खर्च में शामिल है। कोई अतिरिक्त खर्च नहीं।
महावन (पंचमुखी बालाजी महायज्ञ)
यह सबसे उच्च और शक्तिशाली स्तर है जो अत्यंत गंभीर और दीर्घकालिक बाधाओं के लिए किया जाता है। इसमें 41 दिनों का अनुष्ठान होता है जिसमें कई हवन, पाठ, जाप और तांत्रिक साधनाएँ शामिल होती हैं।
41 दिनों का अनुष्ठान
- इस महावन में 41 दिनों तक नियमित अनुष्ठान चलता है। प्रति दिन —
- सुबह हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ। दोपहर सुंदरकांड का पाठ। शाम हनुमान बाहुक का पाठ। रात्रि तांत्रिक हवन और भूत-प्रेत मुक्ति मंत्र का जाप।
- पंचमुखी बालाजी के मित्रों का जाप
- इस महावन में केवल पंचमुखी बालाजी का ही नहीं, बल्कि उनके मित्रों और सहयोगियों का भी जाप किया जाता है —
- भैरव जी — विक्रांत भैरव की विशेष पूजा और जाप। मसान मेलडी माता — श्मशान की अधिष्ठात्री देवी की पूजा।
- शनि देव — शनि पीड़ा से मुक्ति हेतु जाप।
- राहु-केतु — ग्रह बाधा से मुक्ति हेतु जाप।
- मातंगी और बगलामुखी — तांत्रिक सुरक्षा हेतु जाप।
विशेष सूत्र और कवच
इस महावन में पंचमुखी बालाजी सूत्र का निर्माण किया जाता है। यह सूत्र विशेष मंत्रों से सिद्ध किया जाता है और भक्त को धारण कराया जाता है। यह सूत्र जीवनभर भक्त की रक्षा करता है।
पंचमुखी बालाजी कवच — यह एक विशेष कवच है जो 41 दिनों के अनुष्ठान के बाद सिद्ध होता है। इस कवच को घर में स्थापित करने से घर की सभी नकारात्मक शक्तियाँ समाप्त हो जाती हैं।
अंतिम दिन का भव्य महायज्ञ
41वें दिन भव्य महायज्ञ का आयोजन किया जाता है। इसमें —
10,000 आहुतियाँ दी जाती हैं। 11 पंडित एक साथ अनुष्ठान करते हैं। भंडारे का आयोजन — गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। दान — वस्त्र, धन और अन्य वस्तुओं का दान। विसर्जन — सभी नकारात्मक शक्तियों का विसर्जन।
समय और खर्च
इस महावन में 41 दिनों का समय लगता है। खर्च तीन विकल्पों में उपलब्ध है —
- ₹25,000 — मानक महावन, 41 दिनों का अनुष्ठान, प्रति दिन पाठ और जाप, अंतिम दिन महायज्ञ, प्रसाद, यंत्र, रक्षा कवच, सूत्र
- ₹35,000 — विस्तृत महावन, 41 दिनों का अनुष्ठान, प्रति दिन विशेष हवन, अंतिम दिन भव्य महायज्ञ, विशेष प्रसाद, सिद्ध यंत्र, रक्षा कवच, सूत्र, 21 दिनों का अनुष्ठान
- ₹51,000 — अत्यंत विस्तृत महावन, 41 दिनों का अनुष्ठान, प्रति दिन उन्नत तांत्रिक हवन, अंतिम दिन अत्यंत भव्य महायज्ञ, विशेष प्रसाद, सिद्ध यंत्र, रक्षा कवच, सूत्र, 41 दिनों का अनुष्ठान, विशेष तांत्रिक साधना
सभी सामग्री, तांत्रिक समाग्री, भंडारे का खर्च और पंडित जी की दक्षिणा इसी खर्च में शामिल है। कोई अतिरिक्त खर्च नहीं।
41 दिनों के अंदर बड़ी से बड़ी बाधा से मुक्ति प्राप्त होने लगती है। यह पंडित मयंक शर्मा जी का वादा और अनुभव है।
पंचमुखी बालाजी पूजा के उपाय कौन-कौन से है?
दैनिक उपाय
प्रति दिन सुबह हनुमान चालीसा का पाठ करें। मंगलवार और शनिवार को हनुमान मंदिर में दर्शन करें। लाल वस्त्र पहनें और लाल रंग का प्रयोग बढ़ाएँ। बूंदी के लड्डू और केला बालाजी को भोग लगाएँ। सिंदूर और चमेली का तेल हनुमान जी को अर्पण करें।
मंत्र जाप
- बालाजी बीज मंत्र: ॐ हं हनुमते नमः
- पंचमुखी हनुमान मंत्र: ॐ पंचमुखाय विद्महे हनुमते धीमहि तन्नो मारुति प्रचोदयात्
- भूत-प्रेत मुक्ति मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः पंचमुखाय हनुमते रक्ष रक्ष मां भूत प्रेत पिशाच बाधा निवारणाय स्वाहा
- हनुमान गायत्री: ॐ आंजनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्
रत्न और यंत्र
मूंगा (लाल मूंगा) मंगल ग्रह का रत्न है — इसे धारण करने से बालाजी की कृपा बढ़ती है। पंचमुखी हनुमान यंत्र घर में स्थापित करें — यह वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा करता है। 11 मुखी रुद्राक्ष धारण करें — यह हनुमान जी का स्वरूप माना जाता है।
विशेष उपाय
मंगलवार को सिंदूर और चमेली का तेल हनुमान जी को अर्पण करें। शनिवार को mustard oil का दीपक जलाएँ। हनुमान बाहुक का पाठ करें — यह हनुमान जी का एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है। सुंदरकांड का नियमित पाठ करें। लोंग और कपूर का धूप करें — यह अत्यंत प्रभावी उपाय माना गया है।
ये उपाय केवल दोष के प्रभाव को कम करते हैं। पूर्ण निवारण के लिए उज्जैन में विक्रांत भैरव शमशान पीठ में पंडित मयंक शर्मा जी की पंचमुखी बालाजी पूजा अनिवार्य है।
पंचमुखी बालाजी पूजा शुभ तिथियाँ कौन-सी है?
वार्षिक शुभ दिन
- मंगलवार — बालाजी का दिन, सबसे शुभ माना जाता है
- शनिवार — शनि देव के साथ हनुमान जी की पूजा, शनि पीड़ा और भूत-प्रेत से मुक्ति
- मंगलवार और शनिवार का संयोग — अत्यंत शक्तिशाली, विशेष रूप से हवन के लिए
- हनुमान जयंती — 2026 में 1 मई, अत्यंत फलदायी
- राम नवमी — 2026 में 29 मार्च, श्री राम और हनुमान जी की संयुक्त कृपा
- दशहरा — 2026 में 21 अक्टूबर, विजय का प्रतीक, भूत-प्रेत पर विजय
- अमावस्या — नए आरंभ और बाधा मुक्ति के लिए शुभ
मासिक शुभ तिथियाँ
- जनवरी 2026 में 6, 13, 20, 27 तारीख को मंगलवार पड़ रहा है और 10, 17, 24, 31 तारीख को शनिवार है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति है जो विशेष शुभ मानी जाती है।
- फरवरी 2026 में 3, 10, 17, 24 तारीख को मंगलवार है और 7, 14, 21, 28 तारीख को शनिवार है। 14 फरवरी को बसंत पंचमी है।
- मार्च 2026 में 3, 10, 17, 24, 31 तारीख को मंगलवार है और 7, 14, 21, 28 तारीख को शनिवार है। 29 मार्च को राम नवमी है जो अत्यंत शुभ मानी जाती है।
- अप्रैल 2026 में 7, 14, 21, 28 तारीख को मंगलवार है और 4, 11, 18, 25 तारीख को शनिवार है। 1 मई को हनुमान जयंती है जो सबसे शक्तिशाली दिन माना जाता है।
- मई 2026 में 5, 12, 19, 26 तारीख को मंगलवार है और 2, 9, 16, 23, 30 तारीख को शनिवार है। अक्षय तृतीया भी इस महीने पड़ती है।
- जून 2026 में 2, 9, 16, 23, 30 तारीख को मंगलवार है और 6, 13, 20, 27 तारीख को शनिवार है। 21 जून को गंगा दशहरा है।
- जुलाई 2026 में 7, 14, 21, 28 तारीख को मंगलवार है और 4, 11, 18, 25 तारीख को शनिवार है। गुरु पूर्णिमा भी इस महीने आती है।
- अगस्त 2026 में 4, 11, 18, 25 तारीख को मंगलवार है और 1, 8, 15, 22, 29 तारीख को शनिवार है। रक्षाबंधन और कृष्ण जन्माष्टमी इस महीने हैं।
- सितंबर 2026 में 1, 8, 15, 22, 29 तारीख को मंगलवार है और 5, 12, 19, 26 तारीख को शनिवार है। गणेश चतुर्थी और अनंत चतुर्दशी इस महीने हैं।
- अक्टूबर 2026 में 6, 13, 20, 27 तारीख को मंगलवार है और 3, 10, 17, 24, 31 तारीख को शनिवार है। 21 अक्टूबर को दशहरा है जो विजय का प्रतीक है।
- नवंबर 2026 में 3, 10, 17, 24 तारीख को मंगलवार है और 7, 14, 21, 28 तारीख को शनिवार है। दीवाली और गोवर्धन पूजा इस महीने हैं।
- दिसंबर 2026 में 1, 8, 15, 22, 29 तारीख को मंगलवार है और 5, 12, 19, 26 तारीख को शनिवार है। गीता जयंती भी इस महीने आती है।
सबसे शक्तिशाली: हनुमान जयंती (1 मई 2026) अत्यंत शुभ: राम नवमी (29 मार्च), दशहरा (21 अक्टूबर)
उज्जैन में पंचमुखी बालाजी पूजा कैसे करवाएँ?
बुकिंग प्रक्रिया
- पंडित मयंक शर्मा जी से कॉल या व्हाट्सएप पर संपर्क करें
- अपनी समस्या विस्तार से बताएँ — क्या लक्षण हैं, कब से हैं, क्या उपाय किए
- पंडित जी कुंडली का विश्लेषण करेंगे और बाधा की पहचान करेंगे
- पूजा का स्तर चुनें — सामान्य, विशेष, या महावन
- शुभ तिथि और समय का निर्धारण
- बुकिंग कन्फर्म करें और एडवांस भुगतान करें
- पूजा के दिन विक्रांत भैरव शमशान पीठ पहुँचें।
कॉल/व्हाट्सएप: +91-9303125356
समय: सुबह 7 बजे से