जब जन्म कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तो इसे कालसर्प दोष कहा जाता है। ज्योतिष के अनुसार यह दोष जीवन में अचानक रुकावट, मानसिक तनाव, करियर में अस्थिरता, विवाह में देरी और आर्थिक उतार-चढ़ाव ला सकता है। ऐसे में सही मुहूर्त और तिथि में की गई कालसर्प दोष पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
अगर आप अप्रैल 2026 में कालसर्प दोष पूजा उज्जैन में कराने की योजना बना रहे हैं, तो पहले से बुकिंग करना जरूरी है। अमावस्या, प्रदोष और सोमवार जैसे शुभ दिनों पर पूजा के लिए काफी लोग संपर्क करते हैं
अप्रैल 2026 में कालसर्प दोष पूजा क्यों विशेष है?
अप्रैल 2026 हिंदी पंचांग के अनुसार वैशाख मास का महीना है — जो भगवान विष्णु को समर्पित और अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस माह में ग्रह स्थिति भी अनुकूल है:
- वैशाख अमावस्या (17 अप्रैल) — कालसर्प दोष पूजा के लिए वर्ष की सर्वश्रेष्ठ अमावस्याओं में से एक
- दो प्रदोष व्रत — 15 अप्रैल और 28 अप्रैल — शिव कृपा का विशेष समय
- दो एकादशी — 13 अप्रैल (वरूथिनी) और 27 अप्रैल (मोहिनी) — शुद्धि और मोक्ष की तिथियाँ
- मेष संक्रांति (14 अप्रैल) — सूर्य का मेष राशि में प्रवेश — ग्रह शांति के लिए अत्यंत शुभ
- चार शनिवार (4, 11, 18, 25 अप्रैल) — राहु-केतु और शनि पूजा के विशेष दिन
संक्षेप में, अप्रैल 2026 में कालसर्प दोष पूजा के लिए कम से कम 8–10 अत्यंत शुभ तिथियाँ हैं — और इनमें से सबसे श्रेष्ठ तिथि है 17 अप्रैल 2026 — वैशाख अमावस्या।
कालसर्प दोष पूजा शुभ तिथि और मुहूर्त की पूरी सूची- अप्रैल 2026
सटीक मुहूर्त आपकी जन्म कुंडली देखकर ही तय होता है, लेकिन सामान्य पंचांग के अनुसार अप्रैल में कालसर्प दोष पूजा निम्न तिथियों के लिए शुभ मानी जा सकती हैं:
| क्र. | तिथि और दिन | तिथि/पर्व का नाम | तिथि प्रारंभ — समाप्ति (IST) | पूजा की श्रेष्ठता |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 17 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) | वैशाख अमावस्या | 16 अप्रैल रात 8:11 PM — 17 अप्रैल शाम 5:21 PM | सर्वश्रेष्ठ |
| 2 | 15 अप्रैल 2026 (बुधवार) | कृष्ण प्रदोष व्रत + त्रयोदशी | सायं 6:30 — 8:00 PM (प्रदोष काल) | |
| 3 | 16 अप्रैल 2026 (गुरुवार) | मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी) | सारा दिन — निशीथ काल में पूजा सर्वोत्तम | |
| 4 | 14 अप्रैल 2026 (मंगलवार) | मेष संक्रांति / बैसाखी | सूर्योदय से पूर्व स्नान + पूजा | |
| 5 | 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) | वरूथिनी एकादशी | 13 अप्रैल — श्रीहरि और नवग्रह पूजन | |
| 6 | 28 अप्रैल 2026 (मंगलवार) | शुक्ल प्रदोष व्रत | सायं 6:45 — 8:15 PM (प्रदोष काल) | |
| 7 | 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) | मोहिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष) | शुक्ल एकादशी — विष्णु और नवग्रह पूजन | |
| 8 | 18 अप्रैल 2026 (शनिवार) | शनिवार (शनि + राहु-केतु दिन) | राहुकाल: प्रातः 9:00 — 10:30 AM | |
| 9 | 25 अप्रैल 2026 (शनिवार) | शनिवार (शुक्ल पक्ष) | राहुकाल: प्रातः 9:00 — 10:30 AM | |
| 10 | 22 अप्रैल 2026 (बुधवार) | बुधवार (राहु प्रिय वार) | राहुकाल: दोपहर 12:00 — 1:30 PM |
17 अप्रैल 2026 — वैशाख अमावस्या: कालसर्प पूजा का सर्वश्रेष्ठ दिन
अप्रैल 2026 में कालसर्प दोष पूजा के लिए 17 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) — वैशाख अमावस्या सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली तिथि है। यह दिन क्यों इतना विशेष है — जानें:
वैशाख अमावस्या का ज्योतिषीय महत्व
- अमावस्या — कालसर्प दोष पूजा के लिए सर्वोत्तम तिथि। इस दिन चंद्रमा और सूर्य एक साथ होते हैं, जिससे पितृ लोक और भूलोक के बीच सबसे पतली दीवार होती है।
- वैशाख मास — भगवान विष्णु का प्रिय मास। इस मास में की गई पूजा का फल अन्य माह से अधिक होता है।
- राहु-केतु की विशेष स्थिति — अमावस्या को राहु और केतु की ऊर्जा अत्यंत सक्रिय होती है, इसलिए उनका जाप सर्वाधिक प्रभावशाली होता है।
- पितृ तर्पण — इस दिन पितरों को तर्पण देने से पितृ दोष और कालसर्प दोष दोनों में लाभ मिलता है।
- क्षिप्रा स्नान — वैशाख अमावस्या को क्षिप्रा नदी में स्नान का विशेष महत्व है।
“17 अप्रैल 2026 वैशाख अमावस्या को उज्जैन में हजारों श्रद्धालु कालसर्प दोष पूजा के लिए आते हैं। इसलिए कम से कम 7–10 दिन पहले बुकिंग करना अनिवार्य है।”
15 अप्रैल 2026 — कृष्ण प्रदोष व्रत (बुधवार)
प्रदोष व्रत हर माह में दो बार आता है — कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को। यह भगवान शिव को समर्पित विशेष दिन है। 15 अप्रैल 2026 (बुधवार) को आने वाला कृष्ण प्रदोष विशेष है क्योंकि:
- यह बुध प्रदोष है — बुधवार + प्रदोष = राहु शांति के लिए अत्यंत शुभ
- यह अमावस्या से मात्र 2 दिन पहले है — कृष्ण पक्ष की तीव्र ऊर्जा का समय
- प्रदोष काल में की गई शिव पूजा राहु-केतु दोष को तीव्रता से शांत करती है
15 अप्रैल 2026 — प्रदोष काल का समय (उज्जैन)
| विवरण | समय (IST — उज्जैन) |
|---|---|
| त्रयोदशी तिथि प्रारंभ | 14 अप्रैल, रात — (स्थानीय पंचांग देखें) |
| प्रदोष काल प्रारंभ | सायं 6:30 PM (लगभग) |
| प्रदोष काल समाप्ति | रात 8:00 PM (लगभग) |
| पूजा का सर्वोत्तम समय | सायं 6:30 — 7:30 PM |
| शिवलिंग अभिषेक | प्रदोष काल में |
प्रदोष के दिन क्या करें: शाम को महाकालेश्वर मंदिर या किसी शिव मंदिर में जाकर बेलपत्र, दूध, जल से अभिषेक करें। “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप करें और राहु-केतु शांति की प्रार्थना करें।
16 अप्रैल 2026 — मासिक शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी)
अमावस्या से ठीक एक दिन पहले 16 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को मासिक शिवरात्रि है। यह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी — माह का सबसे शक्तिशाली शिव पूजन का दिन।
इस दिन विशेष रूप से:
- रात्रि के चार प्रहर में शिव पूजन होता है
- राहु-केतु की विशेष शांति पूजा कराई जाती है
- उपवास रखकर रात्रि जागरण और भजन किए जाते हैं
- यह तिथि अगले दिन की अमावस्या पूजा की पूर्व-तैयारी के लिए आदर्श है
विशेष सुझाव: यदि आप उज्जैन आ रहे हैं, तो 16 अप्रैल को पहुँचें — शाम को मासिक शिवरात्रि पूजन करें, रात को विश्राम करें और 17 अप्रैल को प्रातः क्षिप्रा स्नान और कालसर्प दोष पूजा कराएं। यह दो दिन का अनुभव अत्यंत फलदायी रहेगा।
14 अप्रैल 2026 — मेष संक्रांति (बैसाखी)
14 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को मेष संक्रांति है — जब सूर्य देव मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करते हैं। इसे उत्तर भारत में बैसाखी के रूप में भी मनाया जाता है।
कालसर्प दोष पूजा के संदर्भ में यह दिन महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- सूर्य का नई राशि में प्रवेश — ग्रह शांति पूजा के लिए संक्रांति अत्यंत शुभ होती है
- संक्रांति को पवित्र नदी में स्नान का अपार पुण्य मिलता है
- नवग्रह शांति पूजा के लिए संक्रांति आदर्श तिथि है
- इस दिन तिल, गुड़ और वस्त्र का दान राहु-केतु के दुष्प्रभाव को कम करता है
13 अप्रैल 2026 (सोमवार) — वरूथिनी एकादशी (कृष्ण पक्ष)
वरूथिनी एकादशी को पापों से मुक्ति और जीवन में स्थिरता देने वाली एकादशी माना जाता है। यह कालसर्प दोष के कारण जीवन में आ रही अस्थिरता और बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष रूप से प्रभावशाली है।
इस दिन:
- भगवान विष्णु का पूजन और नवग्रह शांति पूजा कराएं
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का 108 बार जाप करें
- उपवास रखें और ब्राह्मण भोजन कराएं
- काले वस्त्र का दान करें — राहु शांति हेतु
27 अप्रैल 2026 (सोमवार) — मोहिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष)
मोहिनी एकादशी शुक्ल पक्ष की एकादशी है और इसे ज्ञान, मोक्ष और माया से मुक्ति की एकादशी माना जाता है। चूँकि केतु माया और मोह को नियंत्रित करता है — केतु दोष से पीड़ित लोगों के लिए यह एकादशी विशेष रूप से लाभकारी है।
अप्रैल 2026 के शनिवार — राहु-केतु शांति पूजा के लिए
शनिवार को राहु और शनि दोनों की शक्ति सक्रिय होती है — इसलिए यह दिन राहु-केतु शांति के लिए विशेष माना जाता है। अप्रैल 2026 में चार शनिवार हैं:
शनिवार को क्या करें: प्रातः काले तिल के तेल का दीपक जलाएं, उड़द दाल का दान करें और “ॐ शनैश्चराय नमः” + “ॐ राहवे नमः” का 108 बार जाप करें।
अप्रैल 2026 — उज्जैन का राहुकाल समय क्या है?
राहुकाल वह दैनिक समय खंड है जब राहु की ऊर्जा सर्वाधिक सक्रिय होती है। राहु की विशेष पूजा, जाप और तर्पण इसी समय में करना सर्वाधिक फलदायी होता है।
उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा कैसे बुक करें?
अगर आप अप्रैल 2026 में शुभ मुहूर्त में कालसर्प दोष शांति पूजा कराना चाहते हैं, तो पहले से तारीख सुरक्षित कर लें। सही समय और विधि से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है तो नीचे दिये गए नंबर पर कॉल करें और अपनी पूजा अभी बुक करें।