शुक्र राहु शांति पूजा उज्जैन: महत्व, प्रक्रिया, उपाय और लाभ
शुक्र और राहु की युति, दृष्टि या 6/8 संबंध बनाते ही “शुक्र-राहु विष दोष” जन्म लेता है। ये दोष इतना […]
शुक्र और राहु की युति, दृष्टि या 6/8 संबंध बनाते ही “शुक्र-राहु विष दोष” जन्म लेता है। ये दोष इतना […]
वैदिक ज्योतिष में गुरु (बृहस्पति) ज्ञान, विवाह, संतान, भाग्य, शिक्षा और जीवन के मार्गदर्शन का कारक माना जाता है। वहीं
वैदिक ज्योतिष में बुध बुद्धि, संवाद, विश्लेषण, गणना, व्यापार और तर्क शक्ति का ग्रह है, जबकि केतु मोक्ष, आध्यात्मिकता, रहस्य,
गुरु और राहु की युति को वैदिक ज्योतिष में एक अशुभ योग माना गया है। इसे गुरु चांडाल दोष और
ज्योतिष में बुध बुद्धि, समझ, तर्क, व्यावहारिक निर्णय, संवाद कौशल और व्यापार का ग्रह माना जाता है। दूसरी ओर राहु
चंद्र शनि दोष तब बनता है जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्रमा और शनि एक ही भाव में
वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब जन्म कुंडली में चंद्रमा और केतु का अशुभ योग बनता है, तब साहस, मानसिक स्थिरता,
नमस्कार! वैदिक ज्योतिष में ग्रहों का प्रभाव हमारे जीवन को गहराई से प्रभावित करता है। इनमें सूर्य केतु दोष एक
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति हमारी कुंडली को प्रभावित करती है, और कभी-कभी कुछ योग जीवन में चुनौतियां पैदा