नवग्रह शांति पंचमुखी हनुमान पूजा उज्जैन

नवग्रह शांति पंचमुखी हनुमान पूजा उज्जैन: जाने विधि और उपाय

नवग्रह शांति पंचमुखी हनुमान पूजा एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली अनुष्ठान है जो नवग्रहों के अशुभ प्रभावों को शांत करने और जीवन में समृद्धि, सुख-शांति प्राप्त करने के लिए किया जाता है। पंचमुखी हनुमान जी का स्वरूप हनुमान जी का सबसे शक्तिशाली और रक्षात्मक रूप माना जाता है। यह पांच मुखों वाला रूप शत्रु नाश, भूत-प्रेत बाधा निवारण, ग्रह दोष शांति और सर्वसिद्धि प्रदान करने वाला है।

शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त निष्ठा से पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ करता है, उसके जीवन से सभी भय और संकट दूर हो जाते हैं। यदि आप भी अपने जीवन में आ रही सभी समस्याओं से छुटकारा चाहते है तो आज ही उज्जैन के अनुभवी पंडित मयंक शर्मा जी से संपर्क करें और सही समाधान पाएँ।

पंचमुखी हनुमान जी का स्वरूप और महत्व क्या है?

अहिरावण ने भगवती भवानी के सम्मान में पांच दिशाओं में पांच दीपक जलाए थे और उसे वरदान प्राप्त था कि जो एक साथ पांचों दीपक बुझा देगा, वही उसका वध कर सकता है। इसलिए हनुमान जी ने भगवान विष्णु, शिव, नरसिंह, वराह और हयग्रीव की शक्ति को अपने में समाहित कर पंचमुखी रूप धारण किया और एक साथ पांचों दीपक बुझाकर अहिरावण का वध किया।

पांच मुखों का धार्मिक महत्व क्या है?

पंचमुखी हनुमान जी के प्रत्येक मुख का अपना विशेष महत्व और शक्ति है:

  • पूर्व मुख (हनुमान मुख): यह मुख पूर्व दिशा की रक्षा करता है। यह मुख शत्रुओं का नाश करने वाला है और भक्तों को साहस और शक्ति प्रदान करता है। इस मुख की पूजा से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
  • दक्षिण मुख (नरसिंह मुख): यह मुख दक्षिण दिशा की रक्षा करता है। भगवान नरसिंह का यह स्वरूप अत्यंत क्रोधित और शत्रु विनाशक माना जाता है। इस मुख की पूजा से गंभीर रोग, तांत्रिक बाधाएं और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
  • पश्चिम मुख (गरुड़ मुख): यह मुख पश्चिम दिशा की रक्षा करता है। गरुड़ देव सर्पों के शत्रु हैं और विष का नाश करने वाले हैं। इस मुख की पूजा से नाग दोष, सर्प भय और विषैले प्रभाव समाप्त होते हैं।
  • उत्तर मुख (वराह मुख): यह मुख उत्तर दिशा की रक्षा करता है। भगवान वराह भूमि और धन-संपत्ति के रक्षक हैं। इस मुख की पूजा से आर्थिक संकट दूर होता है और भूमि संबंधी समस्याएं समाप्त होती हैं।
  • ऊर्ध्व मुख (हयग्रीव मुख): यह मुख ऊपर की दिशा की रक्षा करता है। भगवान हयग्रीव ज्ञान और विद्या के देवता हैं। इस मुख की पूजा से विद्यार्थियों को सफलता मिलती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

नवग्रह शांति पंचमुखी हनुमान पूजा का महत्व क्या है?

ग्रह दोष और उनके प्रभाव कौन-कौन से है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनुष्य के जीवन में नौ ग्रहों का विशेष प्रभाव होता है। ये ग्रह हैं — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। जब ये ग्रह कुंडली में अशुभ स्थिति में होते हैं या शत्रु ग्रह के प्रभाव में आते हैं, तो जीवन में बाधाएं, परेशानियां और नकारात्मक परिणाम उत्पन्न हो सकते हैं। ग्रह दोष के कारण व्यक्ति को नौकरी में असफलता, व्यापार में हानि, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।

पंचमुखी हनुमान पूजा से नवग्रह शांति

पंचमुखी हनुमान जी की पूजा विशेष रूप से उन ग्रहों के दुष्प्रभावों को शांत करने के लिए की जाती है जो मनुष्य के जीवन में कष्ट दे रहे हों। शास्त्रों में बताया गया है कि पंचमुखी हनुमान जी के पांच मुख नवग्रहों के पांच मुख्य देवताओं का प्रतीक हैं और उनकी पूजा से समस्त ग्रह शांत होते हैं। विशेष रूप से शनि, राहु, केतु और मंगल के प्रबल दोषों को पंचमुखी हनुमान पूजा से शांत किया जा सकता है।

मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा और व्रत रखने से सारे दुख दूर होते हैं और ग्रह दोष और शनि के प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है।

नवग्रह शांति पंचमुखी हनुमान पूजा की विधि क्या है?

पूजा के लिए शुभ दिन और समय

पंचमुखी हनुमान जी की पूजा के लिए कुछ विशेष दिन अत्यंत शुभ माने जाते हैं:

  • मंगलवार: यह बालाजी का दिन है और सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन पूजा करने से मंगल दोष, शत्रु बाधा और साहस की कमी दूर होती है।
  • शनिवार: शनि देव के साथ हनुमान जी की पूजा इस दिन विशेष रूप से फलदायी होती है। शनि पीड़ा और भूत-प्रेत से मुक्ति के लिए यह दिन सर्वोत्तम है।
  • अमावस्या: नए चंद्रमा की रात्रि को तांत्रिक दोष, नजर बाधा और पितृ दोष निवारण के लिए पूजा अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
  • कृष्ण पक्ष चतुर्दशी: इस तिथि को भूत-प्रेत बाधा और ग्रहण दोष से मुक्ति के लिए पूजा की जाती है।
  • ग्रहण काल: सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय की गई पूजा कालसर्प दोष और पितृ दोष निवारण में विशेष रूप से लाभदायक होती है।

पूजा स्थल की तैयारी

पूजा से पहले पूजा स्थल की शुद्धि अत्यंत आवश्यक है। पूजा स्थान को गंगाजल और गौमूत्र से शुद्ध करें। फिर उसे फूलों और दीपों से सजाएं। पूजा स्थल पर पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। मूर्ति या चित्र की स्थापना दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए क्योंकि पंचमुखी हनुमान जी की पूजा में दक्षिण दिशा विशेष महत्व रखती है।

पूजा सामग्री

नवग्रह शांति पंचमुखी हनुमान पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:

पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति या चित्र, लाल या गेरुए वस्त्र, रुद्राक्ष की माला, लाल चंदन, सिंदूर, लाल फूल, चमेली का तेल, दीपक, धूप, अगरबत्ती, गुड़, चने, बूंदी के लड्डू, नारियल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), गंगाजल, हल्दी, कुमकुम, चावल, नवधान्य (नौ प्रकार के अनाज), नवग्रहों के लिए विशेष वस्तुएं जैसे गेहूं, मूंग, चने की दाल, काला तिल, सरसों आदि।

पूजा विधि का क्रम

  • स्नान और वस्त्र धारण: पूजा से पहले प्रातःकाल स्नान करें और स्वच्छ लाल या गेरुए वस्त्र धारण करें। ये वस्त्र पवित्रता और ऊर्जा का प्रतीक हैं।
  • गणेश पूजन: सभी अनुष्ठान भगवान गणेश का आह्वान करके शुरू होते हैं, ताकि बाधाओं को दूर किया जा सके। गणेश जी को मोदक, दूर्वा और फूल अर्पित करें।
  • कलश स्थापना: दिव्य ऊर्जा प्राप्त करने के लिए एक पवित्र जल पात्र (कलश) स्थापित करें। कलश में गंगाजल, तुलसी पत्र और सुपारी रखें।
  • पंचमुखी हनुमान जी की स्थापना: पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने आसन लगाएं। मूर्ति पर पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद शुद्धि के प्रतीक गंगा जल से स्नान कराएं। फिर लाल चंदन और सिंदूर से तिलक लगाएं।
  • नवग्रह आह्वान: नवग्रहों की स्थापना के लिए विशेष प्रतीकों या रंगीन अनाजों (नवधान्य) का उपयोग करें। सभी ग्रहों का पवित्र स्थान में विशिष्ट बीज मंत्रों के साथ स्वागत करें। प्रत्येक ग्रह को उनका प्रिय द्रव्य, पुष्प और धूप अर्पित करें।
  • पंचमुखी हनुमान कवच पाठ: अब पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ करें। इस कवच का पाठ मंगलवार, शनिवार, अमावस्या और चतुर्दशी को करना सबसे शुभ माना जाता है। कवच का पाठ कम से कम 108 बार रुद्राक्ष माला से करना चाहिए।
  • पंचमुखी हनुमान कवच मंत्र:

श्रीगणेशाय नमः। श्रीरामदूताय नमः।।

ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचस्य। ब्रह्मा ऋषिः। गायत्री छन्दः। पञ्चमुखी श्रीहनुमान देवता। हं बीजं। हं शक्तिः। हुं कीलकम्। मम शत्रु संहारार्थे विनियोगः।।

पूर्वतस्तु कपिः पातु, दक्षिणे पातु लक्ष्मणः। पश्चिमे पातु गरुत्मा, उत्तरस्येन्द्रवरदः। ऊर्ध्वे हयग्रीवो मां पातु, अधो मे पातु भैरवः।।

रामदूतः पातु मां सर्वतोऽसि हरिः सदा। सर्वे किल्बिषसंहारं कुरु मे कपिनायक।।

पादौ पातु पवनपुत्रः, जानुनी पातु भीषणः। ऊरू पातु महावीर्यः, कटी पातु महाबलः।।

नाभिं पातु सुग्रीवो, हृदयं पातु रामभृत्। स्तनौ पातु महाशक्तिः, बाहू पातु महाद्युतिः।।

कण्ठं पातु महावीर्यः, मुखं पातु महाबलः। जिह्वां पातु रामदूतः, दंष्ट्रां पातु महाबलः।।

नेत्रे पातु महाप्रज्ञः, श्रोत्रे पातु महाबलः। नासिकां पातु सुग्रीवः, कर्णौ पातु विभीषणः।।

शीर्षं पातु रामदासः, सर्वाङ्गं रघुनायकः। सर्वदुष्टप्रशमनं सर्वसौख्यप्रदायकम्।।

एतत्कवचं पवित्रं त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः। सर्वशत्रुविनाशं च धान्य-धान्य-समृद्धिदम्।।

राजद्वारे, रणमध्ये, श्मशाने पर्वतोपरे। भीत: पश्यति यं यं तं तं रूपं धरते कपिः।।

यः पठेत्प्रयतो नित्यं त्रिसंध्यं श्रद्धयान्वितः। सप्तजन्मार्जितं पापं तत्क्षणात् विनिवार्यते।।

इति श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचं सम्पूर्णम्।।

  • हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ: पंचमुखी हनुमान कवच के पाठ के बाद हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करें। इनका नियमित पाठ ग्रह दोषों से मुक्ति दिलाता है।
  • हवन और आहुति: हवन कुंड में पवित्र लकड़ी और घी से अग्नि प्रज्वलित करें। नवग्रहों के विशेष मंत्रों का उच्चारण करते हुए घी, हवन सामग्री और ग्रहों के अनुसार समर्पित वस्तुएं डालकर आहुति दें। हवन शांति का मूल तत्व है जिससे आपकी प्रार्थनाएं सीधे दिव्य लोकों तक पहुंचती हैं।
  • आरती और प्रसाद: पूजा के बाद पंचमुखी हनुमान जी की आरती करें। आरती के बाद गुड़ और चने का भोग लगाएं। प्रसाद को सभी में बांटें।
  • दान और पूर्णाहुति: अंत में अनाज, वस्त्र या तेल जैसी वस्तुओं का दान करें। यह कर्म ऋणों को संतुलित करने में मदद करता है। जरूरतमंदों को भोजन कराएं।

नवग्रह शांति पंचमुखी हनुमान पूजा के लाभ कौन-कौन से है?

  • पंचमुखी हनुमान जी की पूजा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। राजनीति, कोर्ट केस और व्यापारिक क्षेत्र में शत्रु नष्ट होते हैं। रात के भय और बुरे सपने समाप्त होते हैं।
  • यह पूजा विशेष रूप से शनि, राहु, केतु और मंगल के दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक है। कालसर्प दोष, पितृ दोष और नाग दोष से मुक्ति मिलती है। ग्रहों की शांति के लिए नियमित मंत्र जाप करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
  • पंचमुखी हनुमान जी की पूजा से आर्थिक संकट से मुक्ति मिलती है। व्यापार में वृद्धि होती है और स्थायी सुख की प्राप्ति होती है। घर में पंचमुखी हनुमान जी का चित्र उचित स्थान और दिशा में रखने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।
  • इस पूजा से रोगों में सुधार होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। गंभीर और दीर्घ रोगों से मुक्ति मिलती है। नियमित पाठ से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की शक्ति बढ़ती है।
  • विद्यार्थियों के लिए यह पूजा विशेष रूप से लाभदायक है। परीक्षाओं में सफलता मिलती है और नौकरीपेशा लोगों को प्रगति के अवसर प्राप्त होते हैं। हयग्रीव मुख की कृपा से ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है।
  • पंचमुखी हनुमान जी की पूजा भूत-प्रेत और तांत्रिक बाधाओं से सुरक्षा प्रदान करती है। नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव समाप्त होता है और घर में सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है।

विशेष उपाय और नियम कौन-कौन से है?

नियमित पाठ की विधि

जो लोग नियमित रूप से पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ करना चाहते हैं, उन्हें प्रतिदिन त्रिसंध्या (प्रातः, मध्याह्न और सायंकाल) में पाठ करना चाहिए। पाठ के समय शुद्ध वातावरण में बैठें और एकाग्रचित्त होकर मंत्रों का उच्चारण करें। कम से कम 108 बार जप रुद्राक्ष माला से करें।

मंगलवार और शनिवार के विशेष उपाय

मंगलवार के दिन हनुमान जी को बूंदी के लड्डू और सिंदूर चढ़ाएं। शनिवार के दिन चमेली के तेल से दीपक जलाएं और सरसों के तेल का दान करें। इन दिनों व्रत रखने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

ग्रहों के अनुसार दान

प्रत्येक ग्रह की शांति के लिए विशेष दान किए जाते हैं। सूर्य के लिए गेहूं और गुड़, चंद्र के लिए चावल और सफेद वस्त्र, मंगल के लिए लाल मसूर और लाल चंदन, बुध के लिए मूंग और हरा वस्त्र, गुरु के लिए पीला वस्त्र और चने की दाल, शुक्र के लिए सफेद चंदन और चांदी, शनि के लिए काला तिल और लोहे का दान, राहु के लिए नारियल और नीला वस्त्र, केतु के लिए सरसों और हरा फल का दान करना चाहिए।

सात्विक आहार और जीवनशैली

पूजा के दौरान और उसके बाद सात्विक आहार का सेवन करें। मांसाहार, मद्यपान और अन्य विकारों से दूर रहें। सत्य बोलें और धर्म का पालन करें। ऐसा जीवन ग्रहों के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है।

उज्जैन में नवग्रह शांति पंचमुखी हनुमान पूजा की बुकिंग कैसे करें?

इस पूजा को पूरे विधि-विधान, श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से व्यक्ति को अवश्य ही सफलता, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आज ही नवग्रह शांति पंचमुखी हनुमान पूजा करें और भगवान पंचमुखी हनुमान जी की कृपा प्राप्त करें।

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